सुबह तकरीबन 4 बजे के करीब बिहार में बाहुबली से नाम से जाने जाना वाला आनंद मोहन जेल से रिहा हो चुका है अब सियासत अपने चरम पर है कई सवाल अभी भी सरकार पर उठ रहे है.
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बिहार में दो दिनों से लगातार नीतीश कुमार की आलोचना हो रही थी और यह आलोचना जिस चीज को लेकर हो रही थी आखिरकार वो चीज सच साबित हो गई यानि की पूर्व सांसद आनंद मोहन की सुबह तकरीबन 4 बजे के करीब रिहाई हो गई है हालाकिं अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि आखिर यह रिहाई कराई क्यों गई है 26 अप्रैल तक यह खबर थी कि सहरसा जेल बाहुबली की रिहाई गुरूवार को दोपहर तक करेगा लेकिन सुबह-सवेरे यह रिहाई आखिर क्यों हुई है इसपर सबका शक जा रहा है.
इससे पहले की बात करें तो पूर्व सांसद अपने बेटे की सगाई में उपस्थित होने के लिए 15 दिनों के लिए पैरोल पर बाहर आए थे सुबह से ही आनंद के समर्थक जेल के बाहर जुटने लगे थे इसीलिए यह माना जा रहा था कि दोपहर तक यहां सहरसा जेल के बाहर समर्थकों का हूजुम लग जाता और फिर मीडियाकर्मी भी सवाल जवाब करते इन सब चीजों से बचने के लिए पहले ही जेल से बाहुबली को रिहा कर दिया गया.
कौन से केस में अंदर थे आनंद मोहन
कई सालों से जेल के चार दिवारी में बंद थे आनंद मोहन अब बाहर आ चुके है चलिए जानते है कि आखिर कौन से गुनाह में वो जेल के अंदर गए थे 4 दिसंबर 1994 में छोटन शुक्ला की हत्या कर दी थी छोटन शुक्ला आनंद मोहन के ही पार्टी के नेता थे फिर आया 5 दिसंबर जब मुजफ्फरपुर में भारी प्रदर्शन किया गया बाहुबली के नेतृत्व में यह हंगामा हुआ फिर आनंद ने भीड़ को काफी भड़काया इसी प्रदर्शन के दौरान कृष्णैया लौट रहे थे फिर आक्रोषित भीड़ ने कृष्णैया की गाड़ी पर हमला बोल दिया उस समय जीलाअधिकारी को पीटा गया फिर गोली से मारकर हत्या कर दी गईं.
रिहाई के लिए जेल मैनुअल को बदला गया
बिहार के सीएम पर कई सवाल इस वक्त खड़े हो रहे है यह भी इल्जाम लग रहे है कि जेल के मौनुअल में भी बदलाव किया गया है ना सिर्फ आनंद मोहन बल्कि उनके साथ 27 कैदियों को भी संशोधन के बाद रिहा किया गया है इसके लिए विधि विभाग ने नोटिफिकेशन जारी भी किया था बताते चले कि आनंद मोहन गोपालगंज के तत्कालीन डीएम जी कृष्णैया की हत्या मामले में सजा पूरी कर चुके है. इसके लिए तकरीबन 15 साल तक जेल में बंद रहे है