कानपूर जैसे शहर के अस्पतालो में भी नहीं है किसी प्रकार की सुविधा

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओ को सुधारने के लिए, करोड़ो खर्च होता है। लेकिन कानपुर देहात जिले के जिला अस्पताल में एक बेड पर दो मरीजो का इलाज हो रहा है, जिससे एक दूसरे को बीमारियों का खतरा भी होने की संभावना है।

कानपुर देहात जिले के इकलौते जिले का जिला अस्पताल है, जहा मरीजो की तो लाइन लगी है लेकिन व्यवस्थाए नही हैं मरीजो को एक बेड पर लिटाया गया है चाहे भले ही उन के साथ कोई अनहोनी हो जाए। यहां तक कि खूंटे पर टँगी गलूकोज की बोतल मरीज को ऐसे चढ़ाई जाती है जैसे किसी झोलाछाप डॉक्टर अपनी दुकानों पर मरीजो को बोतले चढ़ाता हो। मरीजो के साथ आए तीमारदारों का कहना है कि यह केवल नाम का जिला है पर व्यवस्थाए नहीं हैं, पहले हमारी अकेली बेटी बेड पर लेटी थी। लेकिन डॉक्टरों ने कहा कि इन को भी अपने बेड पर लिटा लो अस्पताल में बेड नहीं है। व्यवस्था की बात करे तो 9 बजे से लेकर 1 बजे तक कोई भी डॉक्टर मरीजो को देखने नहीं आता है, केवल नर्स दुवारा ही मरीजो को देखा जा रहा है।

जब हमने इस पूरे मामले को लेकर यहाँ के डॉक्टरों से बात की तो उन का कहना था कि इस अस्पताल की क्षमता ही 70 बेड़ो की है। अब क्या करे जब मरीज खुद आ रहा है और कह रहा है कि हमे एडमिट कर लो भले ही घरती पर बैठ कर इलाज कर देना तो हम भर्ती कर रहे है। वहीँ डॉक्टर खुद मान रहे हैं कि एक साथ लेटने से मरीजो को एक दूसरे की बीमारी लग सकती है, वही अब देखने वाली बात है कि एक तरफ भले ही सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने में लगी हो पर अधिकारी इन बातों को दरकिनार कर देते है लेकिन क्या इन तस्वीरों के बाद इन की तस्वीरे बदलेगी।

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