इस हफ्ते चलेगी गाजियाबाद-नई दिल्ली और पलवल के बीच आधुनिक EMU

भले ही रेलवे अभी तक अत्याधुनिक डीएमयू नहीं चला सका हो और उसे लेकर रेलवे के पास अब तक कोई जानकारी भी नहीं है। यह ट्रेन बीते साल नवंबर से ही दिल्ली पहुंचने के बाद खड़ी हुई है, लेकिन इस बीच उत्तर रेलवे ने यात्रियों की सुविधा के लिए एक नई ईएमयू चलाने की तैयारी पूरी कर ली है। यह अत्याधुनिक ईएमयू कई तरह की सुविधाओं से लैस होगी। ईएमयू का रैक रिप्लेस किया जाएगा, यह नई सर्विस के तौर पर शुरू नहीं होगी। इस ईएमयू को इसी हफ्ते चलाने की तैयारी है।

इस नए अत्याधुनिक गुलाबी रैक को गाजियाबाद-नई दिल्ली-पलवल के बीच चलाया जाएगा। इसे इंट्रीगल कोच फैक्ट्री चेन्नै में तैयार किया गया है। ईएमयू का नया रैक गाजियाबाद-नई दिल्ली-पलवल के बीच चलने वाली ईएमयू संख्या 64075/64424/64427/64080 को रिप्लेस करेगा।

क्या है खासियत
इस ईएमयू की खासियत यह है कि इसका ड्राइवर केबिन पूरी तरह एसी का है और लेटेस्ट डिजिटल टेक्नॉलजी से लैस है। इंजन में ही ड्राइवर के सामने पूरी ट्रेन के डिजिटल कंट्रोल पैनल दिए गए हैं। ट्रेन के अंदर कहीं कोई खराबी आती है, तो वह खराबी ड्राइवर को सामने पैनल की स्क्रीन पर दिखाई दे जाएगी। ट्रेन के सभी कोच पूरी तरह स्टेनलेस स्टील के बने हैं। कोचों की सीटे भी स्टेनलेस स्टील की हैं। ट्रेन में दो कोच महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। साथ ही इस ट्रेन में दिव्यांगों के लिए भी कोच हैं।

इतना ही नहीं, यह पुरानी ईएमयू की स्पीड अभी तक 95 किलोमीटर प्रति घंटे की है, जबकि यह ईएमयू 110 किलोमीटर प्रति घंटे के हिसाब से दौड़ सकती है। उत्तर रेलवे के अधिकारी ने बताया कि नए ईएमयू की 6 रैक खरीदी हैं। इनमें से 2 गाड़ियां उत्तर रेलवे को मिल चुकी है। पलवल नई दिल्ली और गाजियाबाद के बीच इन गाड़ियों का ट्रायल हो चुका है। अब इसे कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी से भी क्लियरेंस दिया जा चुका है।

इतना ही नहीं महिला स्पेशल कोच की सुरक्षा के लिए इसके गेट पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं। यह ट्रेन जीपीएस से लैस है। इसकी वजह से ट्रेन की लोकेशन यात्रियों के साथ कंट्रोल रूम को भी मिलेगी। ट्रेन में एलईडी स्क्रीन, वेंटिलेशन वगैरह की सुविधा भी है।

इतना ही नहीं यह ट्रेन बिजली की खपत भी कम करेगी। इसके लिए इस ट्रेन को ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह ब्रेक लगाने पर बिजली जेनरेट करती है। ब्रेक लगने पर इस ट्रेन में मौजूद स्पेशल मोटर डायनेमो शुरू हो जाते हैं और बिजली जनरेट करते हैं। फिर ट्रेन के सिस्टम के जरिए यह बिजली वापस पैंटोग्राफ के जरिए पावर ग्रिड में लौट आती है। इतना ही नहीं यह ट्रेन पुरानी ईएमयू की तुलना में शोर भी काफी कम करती है।

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